World Bee Day – 2022 – Wishes in Hindi

विश्व मधुमक्खी दिवस पर एक विशेष लेखन

सागर मंथन से निकले अमृत पर देवों का था एकाधिकार,
छल किया जब स्वरभानू ने,
सुदर्शन चक्र का हुआ प्रहार,
विभक्त हुआ फिर दो भागों में,
नाम मिला फिर राहू ,केतू।

धरा का पावन अमृत शहद है,
जिसे मधुमक्खी बनाती है,
स्वाद, गंध, औषध, भेषज
न जाने कितने उपयोग में आता है।

धरती का यह कीट मधुमक्खी,
वरदान है मानव के लिए,
फूल फूल पर मंडरा मंडरा कर
हरियाली फैलाने के लिए।

अंधेरे कोनों को रौशन करती,
मोम से इसके मोमबत्ती बनती,
धर्म स्थल हो या शहीद स्मारक,
कैंडल मार्च होता इसके बल पर।

जैसे गुलाब में काॅटे होते,
डंक के इसके भी चर्चे होते,
नियम है बस यह सृष्टि का,
दुष्ट को सबक कभी तो मिलता।


मधुमक्खी

कोई अपने बड़े होने का अहंकार करे तो क्यूॅ करे,
अहमियत तो होती है उपयोगिता की,
एक छोटा सा कीट जिसे नाम दिया मधुमक्खी,
धरा पर गुणकारी अमॄत (मधु) प्रदाता मधुमक्खी,
नन्हें नन्हें पंखों से दूर तलक उड़ती जाती,
सुन्दर सुन्दर फूलों से रस निचोड़ कर लाती,
अपने छोटे छोटे घरों (छत्तों) में रह कर
नित नित मधु बनाती।
हमारे त्योहार मनाने के लिए,
अंधेरों को दूर भगाने के लिए,
मोम हमें यह देती है
कहने को यह छोटा सा कीट, काम
बड़े यह करती है, नन्हे नन्हे अपनो परों
में परागकणों को चिपका कर दूर तलक फैलाती है,
धरती माॅ की छाती पर नित नये नये फूल खिलाती है,
किसी दिन कोई नयी मधुमक्खी आकर,
फिर उनका रस चुराती है।
मानव की निर्ममता देखो,
इस मधु को पाने के लिए उनके घरों में आग लगाता है,
कुछ जल जाती, कुछ मर जाती,
कुछ दूर तलक उड़ जाती है,फिर एक नया आशना बनाती हैं।
चलता रहता है यह चक्र यूॅ ही,
ये सृष्टि जहाॅ तक जाती।