Poetry on Empathy in Hindi / सहानुभूति

Poetry on Empathy in Hindi

एक प्याली चाय, हजार दुआएँ…

गर्म कम्बलों और रजाईयों में सिमट कर सोने वालों,
फुटपाथ पर सोने वालों की ठिठुरन का कुछ एहसास तो करो ।
घुल जाएगी तुम्हारी ठंडक तड़के की चाय की प्याली में,
उन बेसहारों की सुबह चाय की तलब का कुछ एहसास तो करो।
न होगी तुम्हारी जेब खाली,
उन बेसहारों को जब दोगे चाय की प्याली,
मिलेगा एक मीठा सा सुकंन मन को,
जब दुआयें देंगे वो आपको और आपके अपनों को।


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